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बिन बुझ पहेली



एक नार कुँए में रहे, वाका नीर खेत में बहे।
जो कोई वाके नीर को चाखे, फिर जीवन की आस न राखे।।
 तलवार

एक जानवर रंग रंगीला, बिना मारे वह रोवे।
उस के सिर पर तीन तिलाके, बिन बताए सोवे।।
 मोर

चाम मांस वाके नहीं नेक, हाड़ मास में वाके छेद।
मोहि अचंभो आवत ऐसे, वामे जीव बसत है कैसे।।
 पिंजड़ा

स्याम बरन की है एक नारी, माथे ऊपर लागै प्यारी।
जो मानुस इस अरथ को खोले, कुत्ते की वह बोली बोले।।
 भौं (भौंए आँख के ऊपर होती हैं)

एक गुनी ने यह गुन कीना, हरियल पिंजरे में दे दीना।
देखा जादूगर का हाल, डाले हरा निकाले लाल।
 पान

एक थाल मोतियों से भरा, सबके सर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।
 आसमान

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