जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं , तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधेपन , उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है , इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। गायें सींग मारती हैं , ब्याही हुई गाय तो अनायास ही सिंहनी का रूप धारण कर लेती है। कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है , लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है , किन्तु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना , न देखा। जितना चाहो गरीब को मारो , चाहे जैसी खराब , सड़ी हुई घास सामने डाल दो , उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी नहीं दिखाई देगी। वैशाख में चाहे एकाध बार कुलेल कर लेता है , पर हमने तो उसे कभी खुश होते नहीं देखा। उसके चेहरे पर स्थाई विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है। सुख-दुःख , हानि-लाभ किसी भी दशा में उसे बदलते नहीं देखा। ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं , वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं , पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है। सद्गुणों का इतना अनादर! कदाचित सीधाप...
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